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पॉवर ऑफ अटॉर्नी

 पॉवर ऑफ अटॉर्नी


      कई बार हमें कुछ कामों की जरूरत पड़ती है और हम उन्हें कर पाने में सक्षम नहीं होते या अपना काम छोड़कर वह काम करना नहीं चाहते... या हम बीमार होते हैं और हमारे काम रुक जाते हैं तो... ऐसी स्थिति में हम अपने आप को असहाय महसूस करते हैं... ऐसा ही मामलों में काम आती है पावर ऑफ अटॉर्नी... 

पावर ऑफ अटॉर्नी होती क्या है...?

पावर ऑफ अटॉर्नी एक्ट 1882 के अनुसार एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसके जरिए कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति को अपना लीगल प्रतिनिधि नियुक्त करता है...! 
जो घोषित करता है वो प्रिंसिपल कहलाता है और जो जिसको घोषित किया जाता है उसे एजेंट कहा जाता है...! एजेंट प्रिंसिपल के स्थान पर ज्यूडिशियल, फाइनेंशियल और अन्य फैसले ले सकता है... प्रिंसिपल के स्थान पर कोई डीड आदि साइन कर सकता है... ये सब कानूनन वैध होते हैं...! एजेंट पावर ऑफ अटॉर्नी के दायरे से बाहर नहीं जा सकता, यानी किसी मामले में मनमानी नहीं कर सकता... अगर एजेंट की वजह से प्रिंसिपल को कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई एजेंट ही करेगा, ये भी प्रावधान है...! 

पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे बनाई जाती है...?
पावर ऑफ अटॉर्नी किसी अचल संपत्ति के मालिकाना हक को ट्रांसफर करने लिए, मालिक के बीमार होने, या किसी अन्य वजह से मालिक के कोर्ट में नहीं जा पाने पर तैयार करवाई जाती है... या फिर मालिक फैसला लेने में अक्षम है, तो भी मालिक पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करवा सकता है...! सबसे महत्वपूर्ण है कि पावर ऑफ अटॉर्नी जारी करने वाला यानी प्रिंसिपल मानसिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है...! 


पावर ऑफ अटॉर्नी के प्रकार
  1. General Power of Attorney (GPA)
  2. Special power of Attorney (SPA)
जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी में एजेंट कई अहम फैसले ले सकता है, जैसे संपत्ति की खरीद या बेचान, कोई अनुबंध कर सकता है, या संपति लीज पर दे सकता है...! 

स्पेशल पावर ऑफ अटॉर्नी,  किसी विशेष कार्य के निष्पादन के लिए ही जारी की जाती है, जैसे कोई जमीन या मकान के बेचान के लिए... काम होने के बाद ये पावर ऑफ अटॉर्नी वैलिड नहीं रहती...!

पावर ऑफ अटॉर्नी कब तक वैध रहती है ?
  • प्रिंसिपल यानी मालिक के जिंदा रहने तक.
  • प्रिंसिपल के किसी दुर्घटना में अक्षम हो जाने तक या
  • प्रिंसिपल खुद पावर ऑफ अटॉर्नी को कैंसल कर सकता है.
  • SPA पावर ऑफ अटॉर्नी की वैधता काम खत्म हो जाने तक ही रहती है. 
  • दोनों पक्षों की आपसी सहमति से भी पावर ऑफ अटॉर्नी को कैंसल करवाया जा सकता है.
पावर ऑफ अटॉर्नी को अगर प्रिंसिपल कैंसल करता है तो एजेंट को एक नोटिस भेजना होता है तथा एक नोटिस न्यूज पेपर में भी देना होता है... बिना इनके पावर ऑफ अटॉर्नी कैंसल नहीं हो सकती.

Durable Power of Attorney क्या होती है ?

 इस पावर ऑफ अटॉर्नी में साफ तौर पर लिखवाया जाता है कि प्रिंसिपल के अक्षम होने पर भी एजेंट कोई भी फैसला ले सकता है, इस पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए एजेंट प्रिंसिपल के चिकित्सकीय फैसले भी ले सकता है. हालांकि ये भी प्रिंसिपल के मरने के बाद कैंसल हो जाती है. 

Registration

GPA यानी जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी का रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी नहीं है, फिर भी रजिस्ट्रेशन करवाना बेहतर होता है, इसका रजिस्ट्रेशन सब रजिस्ट्रार कार्यालय में करवाना चाहिए. इसका रजिस्ट्रेशन नोटरी के पास भी करवाया जा सकता है. 

कोई NRI अपनी पावर ऑफ अटॉर्नी कैसे तैयार करवा सकता है ?
      NRI भी अपनी पावर ऑफ अटॉर्नी बनवा सकता है... भारत से बाहर यानी कहीं विदेश में बनवाई गई पावर ऑफ अटॉर्नी को बनवाने की तारीख से 3 महीने के अंदर अंदर भारत में किसी भी जिलाधीश से मान्यता दिलवानी होती है, उसके बाद ये वैध हो जाती है, विदेश में ये सादे कागज पर बनवाकर नोटरी करवाई जा सकती है.  कोई व्यक्ति भारत आए बिना ही यहां अपनी जमीन जायदाद बेचना चाहता है तो उसे सारे कागजात तैयार करवाकर भारत के राजदूत से अनुमति लेकर भारत भेजना होता है.


ये थी जानकारी, पावर ऑफ अटॉर्नी के बारे में... कैसी लगी आपको... कमेंट करके जरूर बताइए...!

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